बहनों की अदला बदली (Incest) 4

जब हम उतरे तब हमारे लण्ड आधे खड़े थे.Antarvasna लड़कियां बैठ गई और अपनी अपनी भोस पोछ कर सफ़ाई करने लगी.

हमारे लण्ड को देख नेहा बोली, “क्या बात है? अभी आप के लण्ड तने हुए है, झुके नही.”
समीर ने कहा, “तुम दोनो की चूत ऐसी रसीली है कि लण्ड को तृप्ति नही होती.”
नेहा बोली, “क्या करेंगे इस का, पूर्वी?”
पूर्वी बोली, “हम उसे मुंह का स्वाद चखायेंगे, लेकिन फ़िर अदला बदाली कर के.”
समीर बोला, “मुंह का तो चखा है. गांड कैसी रहेगी यश?”

दोनो लड़कियाँ खुश हो गयी.

पूर्वी बोली, “लेकिन, भईया, धीरे से मारना.”
मैने कहा, “घबराओ मत. हम टेकनीक जानते है. धीरे से मारेंगे. चलो, मेरे साथ कौन आती है?”

बिना कुछ बोले नेहा मेरे पास आ गयी. पूर्वी क्रीम की ट्यूब और कंडोम ले आयी और समीर के पास चली गयी. दोनो चार पाँव खड़ी हो गयी.

मैने नेहा की गांड पर ढेर सारा क्रीम डाला. हलके दबाव से एक उंगली गांड मे डाली. धीरे धीरे अंदर बाहर कर के और गोल घुमा के गांड के स्नायू को नर्म किया. थोड़ी देर मे दो और बाद मे तीन उंगलियां गांड मे आती जाती हो गयी.

मैने पूछा, “दर्द होता है, नेहा?”
“अजीब किस्म का मज़ा आ रहा है, भईया. मेरी बात मानोगे?”
“क्या?”
“जब मैं लण्ड लेने को तैयार हो जाऊं तब आप समीर को..?”
“पूर्वी का क्या खयाल है, समीर?”
“मैं भी वही चाहती हूँ.” पूर्वी बोली.
“थोड़ी देर तक मारने के बाद अदला बदाली करेंगे.” समीर ने कहा.

हम दोनो ने कुछ देर तक सिर्फ़ उंगलिओं से उन लड़कियों की गांड मारी. जब गांड पूरी रिलैक्स हो गयी तब हम ने कंडोम पहनके उंगलिओं की जगह लण्ड डाले और आहिस्ता आहिस्ता उन दोनो की गांड मारी. जब लण्ड आसानी से आने जाने लगे तब हम ने पोज़िशन बदली. मैं पूर्वी के पीछे आ गया. आगे झुकि हुई पूर्वी ने अपने चूतड़ चौड़े कर रखे थे. मैने लण्ड पर क्रीम लगाया और लण्ड को गांड पर टिकाया. हलके दबाव से मैने लण्ड को पूर्वी की गांड मे डाला. अपनी बहन की गांड खोलाई मे समीर ने अच्छा काम किया था. बिना कोई मुश्किल सारा लण्ड गांड मे उतर गया.

मैने पूर्वी से पूछा, “दर्द होता है?”
सर हिला के उसने ना बोला. गांड को मेरे मोटे लण्ड से परिचित होने तक मैं रुका.

दोस्तो, गांड मे लण्ड का अनुभव एक अजब किस्म का है. जिसने आज़माया ना हो उसे ठीक से बताना मुश्किल है. पूर्वी की गांड के स्नायू ने मेरा लण्ड जकड़ रखा था और संकोचन कर के और ज्यादा पीस डालाते थे.

आखिर मैने धक्के लगाने शुरु किये. टाईट पकड़े हुए लण्ड को आहिस्ता आहिस्ता निकालना डालना पड़ा. जैसे जैसे चुदाई चलती रही वैसे वैसे गांड नर्म होती चली. पंद्रह बीस धक्के बाद गांड चूत जैसी चौड़ी हो गयी. अब मैं तेजी से गांड मारने लगा. आगे झुक कर क्लिटोरिस को भी टटोलने लगा. तकरीबन बीस मिनट की चुदाई के बाद पूर्वी झड़ी. मुझे लगा कि आज मेरा लण्ड टूट के गिर पड़ेगा. पूर्वी के साथ मैं भी झड़ा. नर्म होते लण्ड को मैने निकाला और पूर्वी थक के मुंह के बल लेट गयी.

समीर अभी नेहा की गांड मार रहा था. नेहा मुंह से “आहह…आहह” कर रही थी. समीर के जोरदार धक्के से नेहा के लटके हुए स्तन झूल जाते थे.

“कैसी है नेहा की गांड?” मैने पूछा.
“एक दम टनाटन,” कहते समीर धक्क लगाने मे जुट गया.

नज़दीक जा कर देखा तब पता चला की समीर का लण्ड कैसा था. उसके लण्ड का मुल डन्डी से ज्यादा मोटा था. इसलिये जब लण्ड पूरा गांड मे उतर जाता था तब गांड ज्यादा चौड़ी होती थी. चूत का भी यही हाल होता होगा. जो कुछ हो, नेहा आनंद से लण्ड लिये जा रही थी. थोड़ी ही देर मे वो दोनो एक साथ झड़े.

समीर ने लण्ड निकाला और नेहा लेट गयी. हम सब ने सफ़ाई कर के कपड़े पहन लिये और चाय नश्ता किया.

नेहा बोली, “अब बताईये समीर भईया, पूर्वी को आप ने किस हलात मे चोदा था.”

समीर ने कहा, “मेरे बजाय पूर्वी खुद बतायेगी, यह अच्छा रहेगा.”
नेहा बोली, “नही, समीर भईया, आप ही बतायें. हो सकता है कि शर्म की मारी पूर्वी कोई रसीला हिस्सा छोड़ भी दे.”
समीर ने कहा, “अच्छा, तो बात यह हुई कि…”

समीर ने जो कहानी सुनयी वो आप अगले हफ़्ते मे पढ़ सकेंगे. क्षमा कीजिये.

कैसी लगी यह कहानी?

(समाप्त)

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