Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 1

मैं बचपन से ही बहुत सुंदर थी. मेरा एक छोटा भाई है, विकी. विकी मुझ से

दो साल छोटा है. Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
Antarvasna विकी भी लंबा तगड़ा जवान है. मेरी छातियाँ भर आई थी. बगल

में और टाँगों के बीच में काफ़ी बाल निकलने लगे थे. 18 साल तक पहुँचते

पहुँचते तो मैं मानो पूरी जवान लगने लगी थी. गली में और बाज़ार में लड़के

आवाज़ें कसने लगे थे. ब्रा की ज़रूरत तो पहले से ही पद गयी थी. 18साल में

साइज़ 34 इंच हो गया था. अब तो टाँगों के बीच में बाल बहुत ही घने और

लंबे हो गये थे. हालाँकि कमर काफ़ी पतली थी लेकिन मेरे नितंब काफ़ी भारी

और चौड़े हो गये थे. मुझे अहसास होता जा रहा था कि लड़कों को मेरी दो

चीज़ें बहुत आकर्षित करती हैं – मेरे नितंब और मेरी उभरी हुई छातियाँ.

स्कूल में मेरी बहुत सी सहेलियों के चक्कर थे, लेकिन मैं कभी इस लाफदे

में नहीं पड़ी. स्कूल से ही मेरे पीछे बहुत से लड़के दीवाने थे. लड़कों

को और भी ज़्यादा तड़पाने में मुझे बड़ा मज़ा आता था. स्कूल में सिर्फ़

घुटनों से नीचे तक की स्कर्ट ही अलोड थी. क्लास में बैठ कर मैं अपनी

स्कर्ट जांघों तक चढ़ा लेती थी और लड़कों को अपनी गोरी गोरी सुडोल मांसल

टाँगों के दर्शन कराती. केयी लड़के जान बूझ कर अपना पेन या पेन्सिल नीचे

गिरा कर, उठाने के बहाने मेरी टाँगों के बीच में झाँक कर मेरी पॅंटी की

झलक पाने की नाकामयाब कोशिश करते.

19 साल की उम्र में तो मेरा बदन पूरी तरह से भर गया था. अब तो अपनी जवानी

को कपड़ों में समेटना मुश्किल होता जा रहा था. छातियों का साइज़ 36 इंच

हो गया था.मेरे नितुंबों को संभालना मेरी पॅंटी के बस में नहीं रहा. और

तो और टाँगों के बीच में बाल इतने घने और लंबे हो गये कि दोनो तरफ से

पॅंटी के बाहर निकलने लगे थे. ऐसी उल्हड़ जवानी किसी पर भी कहर बरसा सकती

थी. मेरा छोटा भाई विकी भी जवान हो रहा था, लेकिन आप जानते हैं लड़कियाँ

जल्दी जवान हो जाती हैं. हम दोनो एक ही स्कूल में पढ़ते थे. हम दोनो भाई

बेहन में बहुत प्यार था. कभी कभी मुझे महसूस होता कि विकी भी मुझे अक्सर

और लड़कों की तरह देखता है.

लेकिन मैं यह विचार मन से निकाल देती. लड़कों की ओर मेरा भी आकर्षण बढ़ता

जा रहा था, लेकिन मैं लड़कों को तडपा कर ही खुश हो जाती थी.

मेरी एक सहेली थी नीलम. उसका कॉलेज के लड़के, सुधीर के साथ चक्कर था. वो

अक्सर अपने इश्क़ की रसीली कहानियाँ सुनाया करती थी. उसकी कहानियाँ सुन

कर मेरे बदन में भी आग लग जाती. नीलम और सुधीर के बीच में शारीरिक संबंध

भी थे. नीलम ने ही मुझे बताया था कि लड़कों के गुप्तांगों को लंड या लॉडा

और लड़कियो के गुप्तांगों को चूत कहते हैं. जब लड़के का लंड लड़की की चूत

में जाता है तो उसे चोदना कहते हैं. नीलम ने ही बताया की जब लड़के

उत्तेजित होते हैं तो उनका लंड और भी लंबा मोटा और सख़्त हो जाता है

जिसको लंड का खड़ा होना बोलते हैं. 16 साल की उम्र तक मुझे ऐसे शब्दों का

पता नहीं था. अभी तक ऐसे शब्द मुँह से निकालते हुए मुझे शर्म आती है पर

लिखने में संकोच कैसा? हालाँकि मैने बच्चों की नूनियाँ बहुत देखी थी पर

आज तक किसी मर्द का लंड नहीं देखा था. नीलम के मुँह से सुधीर के लंड का

वर्णन सुन कर मेरी चूत भी गीली हो जाती. सुधीर नीलम को हफ्ते में तीन चार

बार चोद्ता था. एक बार मैं सुधीर और नीलम के साथ स्कूल से भाग कर पिक्चर

देखने गये. पिक्चर हॉल में नीलम हम दोनो के बीच में बैठी थी. लाइट ऑफ हुई

और पिक्चर शुरू हुई. कुच्छ देर बाद मुझे ऐसा लगा मानो मैने नीलम के मुँह

से सिसकी की आवाज़ सुनी हो. मैने कन्खिओ से नीलम की ओर देखा. रोशनी कम

होने के कारण साफ तो दिखाई नहीं दे रहा था

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