Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 11

” लेकिन आप क्या करना चाहते हैं? ऊऊओई मा!” उनका एक हाथ पेटिकोट के ऊपर
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Antarvasna से मेरी चूत सहलाने लगा. मेरी चूत को मुट्ठी में भरते हुए बोले,

” तुम्हें औरत बनाना चाहता हूँ.” ये कह कर उन्होने मेरे पेटिकोट का नारा

खींच दिया. अब तो मेरे बदन पे सिर्फ़ एक पॅंटी बची थी. मुझे अपने बाहों

में ले कर मेरे नितंबों को सहलाते हुए मेरी पॅंटी भी उतार दी. अब तो मैं

बिल्कुल नंगी थी. शर्म के मारे मेरा बुरा हाल था. जांघों के बीच में चूत

को च्छुपाने की कोशिश कर रही थी.

” बाप रे कंचन, ये झांटें हैं या जंगल.मेरा अंदाज़ा सही था. तुम्हें पहली

बार देख के ही समझ गया था कि तुम्हारी टाँगों के बीच में बहुत बाल होंगे.

लेकिन इतने लंबे और घने होंगे ये तो कभी सोचा भी नहीं था.”

” लाइट बंद कर दीजिए प्लीज़.”

” क्यों मेरी जान. इस खूबसूरत जवानी को देखने दो ना.” उन्हने जल्दी से

अपने कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगे हो गये. उनका तना हुआ लंड देख कर

मेरी साँस रुक गयी. क्या मोटा और लंबा लंड था. पहली बार मर्द का खड़ा हुआ

लंड इतने पास से देखा था. उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रख दिया.

” देखो मेरी जान ये ही तुम्हें औरत बनाएगा. 8 इंच का है. छ्होटा तो नहीं है?”

” जी, ये तो बहुत बड़ा है” मैं घबराते हुए बोली.

” घबराव नहीं , एक कच्ची कली को फूल बनाने के लिए मोटे तगड़े लॉड की

ज़रूरत होती है. सब ठीक हो जाएगा. जब ये लंड तुम्हारी इस सेक्सी चूत में

जाएगा तो तुम्हे बहुत मज़ा आएगा.”

” छ्ची कैसी गंदी बातें करते हैं?”” इसमे गंदी बात क्या है? इसको लॉडा ना कहूँ और तुम्हारे टाँगों के बीच

के चीज़ को चूत ना कहूँ तो और क्या कहूँ ?. पहली बार चुदवा रही हो. तीन

चार बार चुदवाने के बाद तुम्हारी शरम भी दूर हो जाएगी. आओ बिस्तेर पर लेट

जाओ” उन्होने मुझे बिस्तेर पे चित लिटा दिया. मेरी टाँगों के बीच में बैठ

कर उन्होने मेरी टाँगों को चौड़ा कर दिया. अब तो मेरी चूत बिल्कुल नंगी

हो गयी.

” ऊओफ़ कंचन! क्या फूली हुई चूत है तुम्हारी. अब तो तुम्हारे इस जंगल में

मंगल होने वाला है.” उन्होने मेरी टाँगें मोड़ के घुटने मेरे सीने से लगा

दिए. इस मुद्रा में तो चूत की दोनो फाँकें बिल्कुल खुल गयी थी और दोनो

फांकों के बीच में से चूत के गुलाबी होंठ झाँक रहे थे. वो अब मेरी फैली

हुई टाँगों के बीच में मेरी चूत को और यहाँ तक की गांद के छेद को भी

आसानी से और खूब अच्छी तरह से देख सकते थे. घनी झांतों को चूत पर से

हटाते हुए काफ़ी देर तक मेरी जवानी को आँखों से चोदते रहे. शरम के मारे

मैं पागल हुई जा रही थी. मैने दोनो हाथों से अपना चेहरा ढक लिया. किसी

अजनबी के सामने इस प्रकार से चूत फैला के लेट्ना तो दूर आज तक नंगी भी

नहीं हुई थी. मैं मारे शरम के पानी पानी हुई जा रही थी. इतने में उन्होने

अपने तने हुए लंड का सुपरा मेरी चूत के खुले हुए होंठों के बीच छेद पे

टीका दिया. मैं सिहर उठी और कस के आँखें बंद कर लीं. उन्होने हल्का सा

धक्का लगा के लंड के सुपरे को मेरी चूत के होंठों के बीच फँसाने की कोशिश

की.

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