Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 14

” अगर तू अपनी बहन की चूत दिलवाएगा तो बताउन्गा.”

Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
Antarvasna ” उसकी चूत तो मैने भी नहीं ली.”

” अच्छा चल दर्शन ही करा दे.”

” ठीक है यार करा दूँगा. कल मेरे घर चल. जब नहाने जाएगी तो देख लेना. अब तो बता दे”

” यार मुझे मालूम था कि दीदी और जीजा जी आने वाले हैं और दीदी यहाँ एक
महीने रहेगी. मेरे और दीदी के कमरे के बीच एक दरवाज़ा है. मैने दीदी के
कमरे के दरवाज़े में बड़ा सा छेद कर दिया और उसमे लकड़ी का गुटका फँसा
दिया. वैसे देखने में पता ही नहीं लगता है कि वहाँ इतना बड़ा छेद है. जीजा
जी आज जाने वाले थे. मुझे मालूम था कि रात में दीदी की चुदाई ज़रूर होगी.
मैने ही दीदी का कमरा उनके आने से पहले तैयार किया था. मैने उनका बेड ठीक
छेद के सामने और दरवाज़े के नज़दीक इस प्रकार से लगाया की सोने वाले की
टाँगें छेद की तरफ हों. छेद में से सब कुच्छ बिल्कुल सॉफ दिखाई देता है.
रात में अगर वरामदे की लाइट ऑन कर दो तो अंडर काफ़ी रोशनी हो जाती है
क्योंकि रोशनदान और खिड़की से काफ़ी लाइट अंडर जाती है. सुबसे अच्छी बात तो
ये हुई की जीजाजी ने भी नाइट लॅंप ऑफ नहीं किया. नाइट लॅंप और रोशनदान से
आती हुई रोशनी से अंडर काफ़ी उजाला हो गया था. इसके इलावा जीजाजी लेटने से
पहले बाथरूम गये ओर बाथरूम का दरवाज़ा और लाइट दोनो खुले छोड़ आए. अब तो
अंडर उजाला ही उजाला था. अपना प्लान ज़रूरत से ज़्यादा कामयाब हो गया.”

” फिर क्या हुआ? जल्दी बता, मेरा लंड तो अभी से खड़ा हो रहा है.”

” रात में खाना खाने के बाद जीजाजी जल्दी ही दीदी को ले कर अपने कमरे में
चले गये. मैने भी अपने कमरे में पहुँच कर लाइट बंद कर दी और लकड़ी का गुटका
दरवाज़े के छेद में से निकाल लिया. अब अंडर सब कुच्छ सॉफ नज़र आ रहा था और
उनकी बातें भी सुनाई पड़ रही थी. जीजाजी काफ़ी उतावले लग रहे थे. उन्होने
कमरे में घुसते ही अपने कपड़े उतार दिए और नंगे हो गये. काफ़ी मोटा लंड है
उनका. अपने कपड़े उतार कर दीदी को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ
चूसने लगे. फिर उन्होने दीदी का कुर्ता उतार दिया और एक झटके से सलवार का
नाडा खींच दिया. दीदी की सलवार खुल के नीचे गिर गयी. अब दीदी सिर्फ़ ब्रा
और पॅंटी में थी. जीजाजी का लॉडा भी तन गया था. दीदी ने पंजों के बल थोड़ा
सा ऊपर हो कर उनका लॉडा अपनी टाँगों के बीच में ले लिया. वो दीदी के होंठों
का रास्पान करते हुए उसकी पीठ और चूतर सहला रहे थे. ऊफ़ क्या विशाल चूतर
थे! शादी से पहले एक बार देखे थे लेकिन अब तो खूब निखर आए थे और फैल भी गये
थे. दीदी की पॅंटी तो उसकी चूतरो की दरार में घुसी जा रही थी.जीजाजी ने दीदी पीठ पे हाथ फेरते हुए
ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को उतार के बिस्तेर पे फेंक दिया. क्या
ज़ालिम चूचियाँ थी! मैने कयि बार दीदी की ब्रा में झाँका था लॅकिन कल रात
पहली बार दीदी की चुचियाँ नंगी देखी. जीजाजी दीदी की चुचिओ को मसल रहे थे
और दीदी ने भी उनके लॉड को सहलाना शुरू कर दिया था. अब जीजाजी ने दीदी की
पॅंटी भी उतार दी. ऊफ़ क्या ग़ज़ब का नज़ारा था. दीदी की चूत पे इतने घने
बाल थे की पूरा जंगल लग रहा था. बाल दीदी की नाभि से आधा इंच नीचे ही शुरू
हो गये थे और पूरी चूत को ढक रखा था. दीदी की चूत के दर्शन तो उसकी शादी से
पहले भी कर चुक्का हूँ पर कल रात तो पहली बार पूरी तरह नंगी देखा. बहुत ही
खूबसूरत लग रही थी. दीदी की मादक सिसकियाँ सुन के मेरा बुरा हाल था. तभी
जीजाजी ने दीदी को उठा के बिस्तेर पे लिटा दिया. दीदी ने अपनी टाँगें मोड़
के चुदवाने की मुद्रा में चौड़ी कर ली. अब तो घनी झांतों के बीच से दीदी की
चूत सॉफ नज़र आने लगी. टाँगों को फैलाने से चूत की दोनो फाँकें चौड़ी हो
गयी थी और चूत के उभरे हुए होंठ खुले हुए थे. ट्रेन में जब मैने दीदी की
कुँवारी चूत के दर्शन किए थे तब तो ये होंठ इतने उभरे हुए नहीं थे और खुले
तो बिल्कुल भी नहीं थे. अब तो ऐसा लग रहा था जैसे दीदी की चूत मुँह फाडे
लंड को निगलने का इंतज़ार कर रही हो. शायद दो साल की चुदाई से चूत की ये
हालत हो गयी थी. इस मुद्रा में दीदी के विशाल चूतर भी फैल गये थे और उनके
बीच में से छ्होटा सा गुलाबी छेद नज़र आ रहा था. दीदी की गांद देख कर तो
मेरा लंड झरते झरते बचा. मुझे पूरा विषवास था कि दीदी की गांद ज़रूर मारी
जाएगी. मुझे जीजाजी से जलन हो रही थी. मेरी दीदी की मेरे ही सामने चुदाई
होने जा रही थी और मैं लंड हाथ में पकड़ के लाचार बैठा था. जीजाजी दीदी की
फैली हुई टाँगों के बीच में बैठ गये और लंड का सुपरा चूत के खुले हुए
होंठों के बीच टीका दिया. फिर उन्होने दीदी की चुचिओ को दोनो हाथों से पकड़
के करारा सा धक्का लगा दिया. जीजाजी का लंड दीदी की चूत को चीरता हुआ आधे
से ज़्यादा अंडर घुस गया. दीदी के मुँह से ऊफ़ ऊफ़ अया…आआहह अया ऊओह ऊवू की
आवाज़ें आ रही थी. जीजाजी लंड पूरा बाहर निकाल कर जड़ तक अंडर पेलने लगे.
दीदी की चूत से फ़च फ़च फ़च का संगीत निकल रहा था. दीदी भी चूतरो को उछाल
उछाल के लंड अंडर ले रही थी. करीब आधे घंटे की भयंकर चुदाई के बाद जीजाजी
झाड़ गये. लगता था उनके लंड ने ढेर सारा वीर्य दीदी की चूत में उंड़ेल दिया
था क्योंकि उनका वीर्य दीदी की चूत से निकल के उसकी गांद की ओर बहने लगा
था. थोड़ी देर में दीदी की गांद का छेद वीर्य से धक गया. जीजाजी ने लंड को
बाहर खींच लिया. लंड प्लॉप की आवाज़ के साथ बाहर आ गया. फिर जीजाजी ने टवल
से दीदी की चूत को सॉफ किया और अपने लंड को भी सॉफ किया. दोनो लेटे हुए
बातें कर रहे थे और दीदी धीरे धीरे जीजाजी के लंड को सहला रही थी. थोरी देर
में लंड फिर से खरा हो गया और जीजाजी ने एक बार फिर दीदी की को चोदा. इस
तरह रात में चार बार दीदी की चुदाई हुई. लेकिन यार जीजाजी ने एक बार भी
दीदी की गांद नहीं मारी. चोदा भी सिर्फ़ एक ही मुद्रा में. लगता है जीजाजी
काम कला में अनारी हैं.”” तू सच कह रहा है यार विकी. इतनी खूबसूरत औरत के
तो तीनो छेद चोदने में मज़ा आ जाए.”

” सच यार, हम तो अपना लंड हाथ में पकड़े अपनी आँखों के सामने अपनी ही बहन
की चुदाई देखते रहे. काश इस लॉड को भी दीदी की चूत नसीब हो जाए!” विकी आहें
भरता हुआ बोला.

विकी और सुधीर की बातें सुन कर मैं दंग रह गयी. हे भगवान! विकी ने तो मेरी चुदाई तक देख ली.

Published by

hindisexstories

Hindi Sex Stories