Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 16

आगे सरकने के बहाने मैं अपनी चूत Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
Antarvasna विकी के मुँह पे रगड़ सकती थी. मुझे अच्छी तरह याद था जब पिच्छली बार मैने
अपनी चूत विकी के मुँह पर रगडी थी. लेकिन उस वक़्त मैने पॅंटी पहनी हुई थी.
किताब छ्चीनने के बहाने मैं तेज़ी से आगे की ओर हुई. अब मेरी चूत ठीक विकी
के मुँह के ऊपर थी. मैने झपट्टा मारा और उसके हाथ से किताब छ्चीनने के
बहाने उसके मुँह पर गिर गयी. ऊऊओफ़! मेरी नंगी गीली चूत विकी के होंठों से
चिपक गयी. मैने अपनी चूत को 5 सेकेंड तक विकी के मुँह पर ज़ोर से दबा दिया.
मेरी चूत इतना रस छोड़ रही थी कि विकी के होंठ और मुँह गीले हो गये. ये ही
नहीं मेरी झाँटें भी उसके मुँह में घुस गयी. विकी हड़बड़ा गया और मैं
किताब छ्चीनने में कामयाब हो गयी. किताब छ्चीन के मैं जैसे ही उठने लगी
विकी ने मुझे गिरा लिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा. अब मैं पेट के बल पड़ी हुई
थी और विकी मेरी पीठ पर बैठा हुआ था. मैने किताब को अपने नीचे दबा लिया.
विकी हांफता हुआ बोला,

” दीदी किताब दे दो नहीं तो छ्चीन लूँगा.”

” अरे जा, जा. इतना दम है तो छीन ले.” मैं उसे चिड़ाती हुई बोली.किताब छीनने के चक्कर में सरक कर
मेरी टाँगों के बीच में आ गया. उसका तना हुआ लंड मेरे चूतरो से टकराने लगा.
वो मुझे गुदगुदी करने लगा और मैं च्चटपटाने लगी. ऐसा करते हुए उसका लंड
कभी मेरे चूतरो की दरार में घुस जाता तो कभी मेरी चूत पे रगड़ जाता. मैं तो
अभी से झरने वाली हो रही थी. अब तो खेल और भी मादक हो गया था. हम दोनो ही
अंजान बने हुए थे. इस छीना झपटी में मेरा गाउन तो खुल ही गया था, शायद विकी
की लूँगी भी खुल चुकी थी. अंधेरा होने के कारण सॉफ दिखाई नहीं दे रहा था.
मैं अचानक झटके से सीधी हो कर पीठ के बल हो गयी. गाउन सामने से पूरा खुल कर
हट गया. विकी मेरे ऊपर चढ़ा हुआ था और मैं उसके नीचे बिल्कुल नंगी थी. मैं
भी विकी को गुद गुडी करने लगी. अंधेरे में कुच्छ दिख तो नहीं रहा था लेकिन
शायद अब तो विकी भी बिल्कुल नंगा था. छ्चीना झपटी का नाटक करते हुए मैने
विकी को अपनी टाँगों के बीच में दबा लिया.

“अब बोल नालयक! कहाँ बच के जाएगा? इतनी कमज़ोर नहीं हूँ.”

” अच्छा दीदी, अभी आपको मज़ा चखाता हूँ.” ये कह के अपने आप को छुड़ाने के
लिए उसने मेरी टाँगें चौड़ी कर दी. टाँगें चौड़ी होते ही उसका तना हुआ लॉडा
मेरी चूत से रगड़ने लगा. मेरी चूत बुरी तरह से गीली थी. रस बाहर निकल के
मेरी झांतों को गीला कर रहा था. मैने उसकी गुदगुदी से बचाने का बहाना करते
हुए टाँगों को मोड़ के अपने सीने से चिपका लिया. ऐसा करने से मेरी फूली हुई
चूत की दोनो फाँकें चौड़ी हो गयी और उसके बीच के होंठ खुल गये. ये तो
चुदाई की मुद्रा थी. इसी मुद्रा में तो औरत अपनी चूत मर्द के लंड को सोन्प
देती है. अब मैने अपने आप को विकी के नीचे इस तरह से अड्जस्ट किया कि विकी
के लंड का सुपरा मेरी चूत के छेद पे टिक गया. मैं सिहर उठी. इसी पल का तो
बरसों से इंतज़ार था.

” विकी मुझ में इतना दम है कि तुझे एक ही झटके में उठा के फेंक दूं.”

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