Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 2

पर जो कुच्छ दिखा उसेदेख कर

मैं डांग रह गयी. Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
Antarvasna नीलम की स्कर्ट जांघों तक उठी हुई थी और सुधीर का हाथ

नीलम की टाँगों के बीच में था. सुधीर की पॅंट के बटन खुले हुए थे और नीलम

सुधीर के लंड को सहला रही थी. अंधेरे में मुझे सुधीर के लंड का साइज़ तो

पता नहीं लगा लेकिन जिस तरह नीलम उस पर हाथ फेर रही थी, उससे लगता था की

काफ़ी बड़ा होगा. सुधीर का हाथ नीलम की टाँगों के बीच में क्या कर रहा

होगा ये सोच सोच कर मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी और पॅंटी को भी

गीला कर रही थी. इंटर्वल में हम लोग बाहर कोल्ड ड्रिंक पीने गये. नीलम का

चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था. सुधीर की पॅंट में भी लंड का उभार सॉफ

नज़र आ रहा था. सुधीर ने मुझे अपने लंड के उभार की ओर देखते हुए पकड़

लिया. मेरी नज़रें उसकी नज़रें से मिली और मैं मारे शर्म के लाल हो गयी.

सुधीर मुस्कुरा दिया. किसी तरह इंटर्वल ख़तम हुआ और मैने चैन की साँस ली.

पिक्चर शुरू होते ही नीलम का हाथ फिर से सुधीर के लंड पे पहुँच गया.

लेकिन सुधीर ने अपना हाथ नीलम के कंधों पर रख लिया. नीलम के मुँह से

सिसकी की आवाज़ सुन कर मैं समझ गयी की अब वो नीलम की चूचियाँ दबा रहा था.

अचानक सुधीर का हाथ मुझे टच करने लगा. मैने सोचा ग़लती से लग गया होगा.

लेकिन धीरे धीरे वो मेरी पीठ सहलाने लगा और मेरी ब्रा के ऊपर हाथ फेरने

लगा. नीलम इससे बिल्कुल बेख़बर थी. मैं मारे डरके पसीना पसीना हो गयी और

हिल ना सकी. अब सुधीर का साहस और बढ़ गया और उसने साइड से हाथ डाल कर

मेरी उभरी हुई चूची को शर्ट के ऊपर से पकड़ कर दबा दिया. मैं बिल्कुल

बेबुस थी. उठ कर चली जाती तो नीलम को पता लग जाता. हिम्मत मानो जबाब दे

चुकी थी. सुधीर ने इसका पूरा फ़ायदा उठाया. वो धीरे धीरे मेरी चूची

सहलाने लगा. इतने में नीलम मुझसे बोली,” कंचन पेशाब लगी है ज़रा बाथरूम

जा कर आती हूँ.” मेरा कलेजा तो धक से रह गया. जैसे ही नीलम गयी सुधीर ने

मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया. मैने एकदम से हड़बड़ा के हाथ

खींचने की कोशिश की, लेकिन सुधीर ने मेरा हाथ कस कर पकड़ रखा था. लंड

काफ़ी गरम, मोटा और लोहे के समान सख़्त था. मैं रुनासि होके बोली

” सुधीर ये क्या कर रहे हो ? छोड़ो मुझे, नहीं तो नीलम को बता दूँगी.”

सुधीर मंजा हुआ खिलाड़ी था, बोला,” मेरी जान तुम पर तो मैं मरता हूँ. तुमने मेरी रातों की नींद चुरा ली

है. मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ.” यह कह कर वो मेरा हाथ अपने लंड

पर रगड़ता रहा.

” सुधीर तुम नीलम को धोका दे रहे हो. वो बेचारी तुमसे शादी करना चाहती है

और तुम दूसरी लड़कियो के पीछे पड़े हो.”

” कंचन मेरी जान तुम दूसरी कहाँ, मेरी हो. नीलम से दोस्ती तो मैने

तुम्हें पाने के लिए की थी.”

” झूट ! नीलम तो अपना सूब कुच्छ तुम्हें सौंप चुकी है. तुम्हें शर्म आनी

चाहिए उस बेचारी को धोका देते हुए. प्लीज़ मेरा हाथ छोड़ो.”

इतने में नीलम वापस आ गयी. सुधीर ने झट से मेरा हाथ छोड़ दिया. मेरी

लाचारी का फायेदा उठाने के कारण मैं बहुत गुस्से में थी, लेकिन ज़िंदगी

में पहली बार किसी मर्द के खड़े लंड को हाथ लगाने के अनुभव से खुश भी थी.

नीलम के बैठने के बाद सुधीर ने फिर से अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया.

नीलम ने उसका हाथ अपने कंधों से हटा कर अपनी टाँगों के बीच में रख दिया

और सुधीर के लंड को फिर से सहलाने लगी. सुधीर भी नीलम की स्कर्ट में हाथ

डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा. जैसे ही नीलम ने ज़ोर की सिसकी ली मैं समझ

गयी कि सुधीर ने अपनी उंगली उसकी चूत में घुसा दी है.

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