Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 3

इस घटना के बाद मैने सुधीर से बिल्कुल बात करना बंद कर दिया. लेकिन अब

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Antarvasna सुधीर मेरे घर के चक्कर लगाने लगा और मेरे भाई विकी से भी दोस्ती कर ली.

वो विकी से मिलने के बहाने घर आने लगा लेकिन मैने उसे कभी लिफ्ट नहीं दी.

कुच्छ दिनों के बाद हमने अपना घर बदल लिया. सुधीर यहाँ भी आने लगा. मेरे

कमरे के बाहर खुला मैदान था. लोग अक्सर मेरी खिड़की के नज़दीक पेशाब करने

खड़े हो जाया करते थे. मेरी तो मानो मन की मुराद ही पूरी हो गयी. मैं

रोज़ खिड़की के पीछे से लोगों को पेशाब करते देखती. दिन में कम से कम 10

से 15 लोगों के लंड के दर्शन हो जाते थे. मुझे काफ़ी निराशा होने लगी

क्योंकि किसी भी आदमी का लंड 2 से 3 इंच लंबा नहीं था. सभी लंड सिकुदे

हुए और भद्दे से लगते थे. किसी का भी लंड देखने लायक नहीं था. नीलम ने

मुझे हिन्दी की सेक्स की कहानियों की राज शर्मा की एक साइट बताई. उसमे

कहानियो के साथ साथ 8 इंच या 10 इंच के लंड का वर्णन था. यहाँ तक कि एक

कहानी में तो एक फुट लंबे लंड का भी जीकर था. केयी दिन इंतज़ार करने के

बाद मेरी मनो कामना पूरी हुई. एक दिन मैं और नीलम मेरे कमरे में पढ़ रहे

थे कि नीलम की नज़र खिड़की के बाहर गयी. उसने मुझे कोहनी मार के बाहर

देखने का इशारा किया. खिड़की के बिकुल नज़दीक ही एक लंबा तगड़ा साधु खड़ा

इधेर उधेर देख रहा था. अचानक साधु ने अपना तहमद पेशाब करने के लिए ऊपर

उठाया. मेरे मुँह से तो चीख ही निकल गयी. साधु की टाँगों के बीच में

मोटा, काला और बहुत ही लंबा लंड झूल रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे उसका लंड

उसके घुटनों से तीन या चार इंच ही उँचा था. नीलम भी पसीने पसीने हो गयी .

लंड बहुत ही भयंकर लग रहा था. साधु ने दोनो हाथों से अपना लंड पकड़ के

पेशाब किया. साधु का लंड देख कर मुझे गधे के लंड की याद आ गयी. मैदान में

केयी गधे घूमते थे जिनके लटकते हुए मोटे लंबे लंड को देख कर मेरी चूत

गीली हो जाती थी. जब साधु चला गया तो नीलम बोली,

” हाई राम ! ऐसा लंड तो औरत की ज़िंदगी बना दे. खड़ा हो के तो बिजली के

खंबे जैसा हो जायगा. काश मेरी चूत इतनी खुशनसीब होती ! ऊऊऊफ़ ! फॅट ही

जाती.” ” नीलम! नीलम ! तू ये क्या बोल रही है. कंट्रोल कर. तुझे तो

सिर्फ़ सुधीर के बारे में ही सोचना चाहिए.”” हां मेरी प्यारी कंचन ! सिर्फ़ फरक इतना है कि सुधीर का खड़ा हो के 6

इंच का होता है और साधु महाराज का सिक्युडा हुआ लंड भी 10 इंच का था.

ज़रा सोच कंचन, एक फुट का मूसल तेरी चूत में जाए तो तेरा क्या होगा.

भगवान की माया देख, एक फुट का लॉडा दिया भी उसे जिसे औरत में कोई

दिलचस्पी नहीं.”

” तुझे कैसे पता साधु महाराज को औरतों में दिलचस्पी नहीं. हो सकता है

साधु महाराज अपने लंड का पूरा इस्तेमाल करते हों.” मैने नीलम को चिड़ाते

हुए कहा.

” हाई मर जाउ ! काश तेरी बात बिल्कुल सच हो. साधु महाराज की रास लीला

देखने के लिए तो मैं एक लाख रुपये देने को तैयार हूँ.”” और साधु महाराज

से चुदवाने की लिए ?”

” ओई मा. साधु महाराज से चुदवाने की लिए तो मैं जान भी देने को तैयार

हूँ. कंचन, तूने चुदाई का मज़ा लिया ही कहाँ है. तूने कभी घोड़े को घोड़ी

पर चढ़ते देखा है? जब ढाई फुट का लॉडा घोड़ी के अंडर जाता है तो उसकी

हालत देखते ही बनती है. साधु महाराज जिस औरत पर चढ़ेंगे उस औरत का हाल भी

घोड़ी जैसा ही होगा.”

मैने कुत्ते को कुतिया पर और सांड को गाय पर चढ़ते तो देखा था लेकिन

घोड़े को घोड़ी पर चढ़ते कभी नहीं देखा था. अब तो साधु महाराज का लंड

मुझे सपनों में भी आने लगा. बड़े और मोटे लंड की तो मैं दीवानी हो गयी

थी. हालाँकि मेरे हज़ारों दीवाने थे पर मैं किसी को लिफ्ट नहीं देती थी.

मुझे उन सबका इरादा अच्छी तरह मालूम था.

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