Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 5

विकी थोड़ा हिचकिचाया और फिर जो बोला उसे सुन कर मैं दंग रह गयी.

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Antarvasna ” नहीं यार. दिल तो बहुत करता है लेकिन मोका कभी नहीं मिला. कभी कभी दीदी

जब लापरवाही से बैठती है तो एक झलक उसकी पॅंटी की मिल जाती है. जब कभी वो

नहा कर निकलती है तो मैं झट से बाथरूम में घुस जाता हूँ और उसकी उतारी

हुई पॅंटी को सूंघ लेता हूँ और अपने लंड पे रगड़ लेता हूँ.”

” वाह प्यारे! तू तो छुपा रुस्तम निकला. कैसी सुघन्ध है तेरी दीदी की चूत की?”

” बहुत ही मादक है यार. दीदी की चूत पे बॉल भी बहुत लंबे हैं. अक्सर

पॅंटी पर रह जाते है. कम से कम तीन इंच लंबी झाँटें होंगी.”

” हाई यार मेरा लंड तो अभी से खड़ा हो रहा है. एक दिन अपनी दीदी की पॅंटी

की महक हमें भी सूँघा दे. तेरा कभी अपनी दीदी को चोदने का मन नहीं करता?”

” करता तो बहुत है लेकिन जो चीज़ मिल नहीं सकती उसके पीछे क्या पड़ना?

दीदी के नाम की मूठ मार लेता हूँ.”विकी और सुधीर की बातें सुन कर मेरा पसीना छ्छूट गया. मेरा सगा भाई भी

मुझे चोदना चाहता है. मैने अब अपनी पॅंटी बाथरूम में कभी नहीं छोड़ी.

मुझे डर था की विकी मेरी पॅंटी सुधीर को ना देदे. मुझे विकी से कोई

शिकायत नहीं थी. आख़िर वो मेरा छ्होटा भाई था. अगर विकी मुझे नंगी देखने

के लिए इतना उतावला था तो हालाँकि मैं उसके सामने खुले आम नंगी तो नहीं

हो सकती थी पर किसी ना किसी बहाने अपने बदन के दर्शन ज़रूर करा सकती थी.

स्कूल ड्रेस में अपनी पॅंटी की झलक देना बड़ा आसान था. सोफा पर बैठ कर

टीवी देखते वक़्त अपनी टाँगों को इस प्रकार फैला लेती की विकी को मेरी

पॅंटी के दर्शन हो जाते. एक दिन मैं स्कूल ड्रेस में ही लेटी बुक पढ़ रही

थी की विकी के कदमों की आहट सुनाई दी. मैने झट से टाँगें मोड़ कर ऊपर कर

ली ओर बुक पढ़ने का नाटक करती रही. मेरी गोरी गोरी मांसल टाँगें पूरी तरह

नंगी थी. स्कर्ट कमर तक ऊपर चढ़ गयी थी. मैने ज़्यादा ही छ्होटी पॅंटी

पहन रखी थी जो बरी मुश्किल से मेरी चूत को ढके हुए थी. मेरी लंबी घनी

झांटें पॅंटी के दोनो ओर से बाहर निकली हुई थी. इतने में विकी आ गया और

सामने का नज़ारा देख कर हरबदा कर खड़ा हो गया. उसकी आँखें मेरी टाँगों के

बीच में जमी हुई थी. इस मुद्रा की प्रॅक्टीस मैं शीशे के सामने पहले ही

कर चुकी थी. मुझे भली भाँति पता था कि इस वक़्त मेरी चूत के घने बॉल

पॅंटी के दोनो ओर से झाँक रहे थे. पॅंटी बड़ी मुश्किल से मेरी फूली हुई

चूत के उभार को ढके हुए थी. मैने उसे जी भर के अपनी पॅंटी के दर्शन कराए.

इतने में मैने बुक नीचे करते हुए पूछा ” विकी क्या कर रहा है? कुच्छ

चाहिए?” विकी एकदम से हार्बारा गया. उसका चेहरा उत्तेजना से लाल था. ”

कुच्छ नहीं दीदी. अपनी बुक ढूंड रहा था. उसकी पॅंट के उभार को देख कर मैं

समझ गयी उसका लंड खड़ा हो गया है. लेकिन विकी के पॅंट का उभार देख कर ऐसा

लगता था कि उसका लंड काफ़ी बड़ा था.

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