Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 18

” बकवास मत कर. मैं सूब समझती हूँ.
ये क्या किया तूने ?” Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
Antarvasna मैं अपनी टाँगें खूब चौड़ी करके उसके लंड को दबाती
हुई बोली. पहली बार उसने नीचे की ओर देखा. अभी तक तो उसकी नज़रें मेरी
चूचिओ पर लगी हुई थी. मेरी फैली हुई टाँगों के बीच के घने जंगल में अपना
लंड मेरी चूत में फँसा हुआ देख कर और भी घबरा गया और लंड को बाहर खींचने की
कोशिश करने लगा. इसीलिए तो मैने उसका लंड पकड़ रखा था.

” दीदी सच मुझे नहीं पता ये कैसे हो गया. मैं तो आपके साथ खेल रहा था.”

” क्यों झूट बोल रहा है. अगर तेरे मन में कोई खोट नहीं था तो तेरा ये खड़ा कैसे हो गया?” मैने फिर से उसका लंड दबाते हुए पूछा.

” सच दीदी आपकी कसम, मुझे कुच्छ पता नहीं चला.”

” नाटक करना बंद कर. ये खड़ा हो गया, तूने अपनी दीदी को नंगी कर दिया और
इसे मेरे अंडर भी घुसेड दिया और तुझे पता ही नहीं चला? तेरे मन में हमेशा
से ही खोट था. तू क्या समझता है मुझे कुच्छ पता नहीं? परसों जब मैं तेरे
बाथरूम से नहा के आई, उसके बाद तूने मेरी पॅंटी के साथ क्या किया था?”

” ज्ज्जीए, दीदी आपको कैसे पता?”

” मुझे सब पता है. मुझे ये भी पता है कि तूने दरवाज़े में छेद कर रखा है
और मेरे कमरे में झाकता है. सच बता तूने अभी तक क्या देखा है?”

” सच दीदी मैने कुच्छ भी नहीं देखा.”

” देख विकी, अगर झूट बोलेगा तो जो तूने आज मेरे साथ किया है मैं मम्मी को
बता दूँगी.तुझे मेरी कसम सच सच सब कुच्छ बता दे. मुझे पता है तेरी उम्र में
लड़के छुप छुप के लड़कियो को देखने की कोशिश करते हैं. सच बोलेगा तो माफ़
कर सकती हूँ.”

” प्रॉमिस करो कि आप मम्मी से शिकायत नहीं करोगी.”

” प्रॉमिस. लेकिन जो पूछुन्गि उसका सच सच जबाब देना. झूट बोला तो शिकायत कर दूँगी.”

” ठीक है दीदी, मैं आपको सब बता दूँगा.”

” तो बता, तुझे मेरी पॅंटी अच्छी लगती है?”

” जी दीदी, बहुत अच्छी लगती है.”

“लेकिन मेरी अलमारी से तो तूने कभी मेरी पॅंटी निकाली नहीं.” ” वो तो सब धूलि हुई पॅंटीस हैं ना.”

” ओ ! तो तुझे पहनी हुई पॅंटी अच्छी लगती हैं?”

“जी.”

” क्यों, मेरी पहनी हुई पॅंटी में ऐसा क्या है?”

” उसमें आपकी …. उम्म… वो चीज़ च्छूपी होती है ना.” विकी शरमाता हुआ बोला.

” वो चीज़ क्या?”

” प्लीज़ दीदी …… आपको पता तो है.”

” मैं तेरे मुँह से सुनना चाहती हूँ. नहीं बताना है तो बोल.”

” नहीं नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है. मेरा मतलब था कि आपकी पॅंटी में आपके टाँगों के बीच की चीज़ च्छूपी होती है इसलिए.”

” टाँगों के बीच की क्या चीज़?”

” ओफ दीदी! आपकी …..उम्म….बहुत गंदा शब्द है, बोला नहीं जा रहा.”

” ये सब करते हुए शर्म नहीं आई अब बोलने में शर्म आ रही है. बोलता है या फिर…?”

” दीदी प्लीज़! मेरा मतलब है आपकी वो… वो… उम्म….उम्म.. च… चू…….चूत.” विकी बुरी तरह शरमाता हुआ बोला.

” ओह! तो चूत बोलने में इतनी शर्म आ रही है जनाब को.”

” दीदी आपके सामने ऐसे शब्द कैसे बोल सकता हूँ?”

” अच्छा ! दीदी की चूत देखने में तो शर्म आई नहीं , चूत बोलने में बड़ी शरम आ रही है. लेकिन पॅंटी को सूंघ क्यों रहा था?”

” बस वैसे ही.”

” वैसे ही ? पॅंटी कोई सूंघने की चीज़ है? या कोई खुशबूदार चीज़ है ?”

” बहुत खुशबूदार चीज़ है दीदी. उसमे आपकी खुश्बू आती है.”

” मेरी खुश्बू तो मेरे दूसरे कपड़ो में भी होती है.”

” नहीं दीदी आपकी च….छ्च ….चूत की महक तो आपकी पॅंटी में ही आएगी ना.”

” ओ ! तो तुझे मेरी चूत की महक बहुत पसंद है ? चल, सूंघने तक तो ठीक है लेकिन उसके बाद तूने क्या किया ?”

” जी, उसके बाद मैने पनती को अपनी टाँगों के बीच में जो होता है उसके ऊपर रग्रा.”

” फिर वोही बात. टाँगों के बीच में क्या होता है?”

” आपको पता तो है.”

” नहीं मुझे क्या पता लड़के उसे क्या बोलते हैं?”

” दीदी उसे लंड बोलते हैं.” विकी शरमाता हुआ बोला.

” अच्छा तो उसे लंड बोलते हैं. लंड के ऊपर रगड़ने में मज़ा आता है?”

” दीदी बहुत मज़ा आता है. एक तो पॅंटी का कपड़ा इतना मुलायम होता है और
फिर ये सोच के कि जो पॅंटी अभी अभी आपकी चूत पर थी अब मेरे लंड पर है. आपकी
चूत का ध्यान करके लंड पे पॅंटी रगड़ने में बहुत ही मज़ा आता है. ”